रात के हल्के धुंधलके में सैकड़ों बिसरी हुई दास्तानों ने एक साथ दस्तक दे दी है। नीले आसमान की रगों में कालिमा पसरती हुई दिख रही है। आसमान से रिसकर अंधेरा मेरी पुतलियों में भी भरने लगा है।
साँसें मंद पड़ने लगी हैं, या फिर रुक ही गई हैं—ज्ञात नहीं। पंछी वापस अपने घरों को लौट रहे हैं, और मन में एक गहरा संतोष है कि कम से कम वे तो लौट रहे हैं। दिन ढल चुका है, सब कुछ ठहर रहा है। यह अनुभव, सुख है या दुःख, ज्ञात नहीं; और अब इसे जान लेने की कोई लालसा भी शेष नहीं है।
दूर कहीं से अगरबत्तियों की मीठी ख़ुशबू मेरे पास आ पहुँची है, जो मेरे इर्द-गिर्द मंडरा रही है। मैं उचक कर उसे चखने की कोशिश करता हूँ। आज तुम बहुत याद आए हो, हर रोज़ से कहीं ज़्यादा। याद आया है—देर रात तक सपने बुनना।
मीलों दूर एक दुनिया है, जहाँ नरम मिट्टी है, और अनंत तक फैली हरी दूबें हैं—जिन पर कूदो तो वे धीरे से उछाल देती हैं। वहाँ सूरज निकलता है पर चुभता नहीं, चाँदनी कानों में खनकती है, और हृदय में इतना ज़्यादा प्रेम है कि कभी-कभार आँखों से छलक जाता है। उस दुनिया में दूसरों की सुषुप्त वेदनाएँ भी सहज महसूस होती हैं।
अब तो गले से उतरता हर एक निवाला अपराध-बोध देता है। इत्र, खुशबुओं, रेशमी वस्त्रों, मांसल गंधों और घी के मालपुओं की आकांक्षाओं से पृथक खड़ी उस दूसरी दुनिया के ख़्वाब गाहे-बगाहे उतर आते हैं। एक अतृप्त प्यास हर रोज़ तीव्र होती जा रही है। रात का हल्का धुंधलका मुझे हर रोज़ तुम्हारी तरफ़ धकेल देता है। आँखों पर पट्टी बाँधे मखमली बिस्तरों की तहों में मैं और कब तक छुप बैठा रहूँगा? आज तुम बहुत याद आए हो, हर रोज़ से कहीं ज़्यादा। तुम कौन हो—महबूब हो, ईश्वर हो, या मेरी अपनी ही परछाईं हो?
(समाप्त)
Audio Credit: "Sirens" by Ludwig Göransson (The Odyssey Original Motion Picture Soundtrack / ℗ Back Lot Music)


अंग्रेज़ी की मरुभूमि में आप का हिंदी लेख एक वसंत की तरह है
Another masterpiece 😇👏