सुबह से ही तेज गिर रही बारिश थोड़ी रुक गई है। धान के कोमल नन्हें पौधों की नाज़ुक जड़ें थामे, मेंढक-मेंढकियां, बादलों की ओट से छुपके, ज़रा चुपके से झांक रहे सूरज को गलियाने लगते हैं। एक सुर में 'टर्रर्र-टर्रर्र' गीत गाते, नाच रहे मेंढकों को बेचारा सूरज भी कौतूहलवश देखना चाहता है। ये मेढ़क भी बड़े ढीठ हैं, ज्यों झाँका त्यों गालियां देना शुरू। किसी की गाली, किसी का संगीत।
शरारत भरे आंखों वाले खिलखिलाते बच्चे, दबे पाँव अपने अपने रसोईघरों के दरवाजों की किल्ली में खोंसी हुई प्लास्टिक की पन्नी चुपके से निकाल लाए हैं। सिर पर उन्हीं पन्नियों की औंधी टोपी लगाए स्कूल की तरफ गीत गाते भागे चले जा रहे हैं। टपर टपर आज केवल दो चार बूंदे ही गिर रही हैं। सिर पर उन्हीं गिरती बूँदों की गुदगुदी से ही वह कुछ और खिलखिला उठे हैं।
उनके कंधों पर खाद के नए खाली बोरे का रेनकोट है। धान के खेत जो अभी-अभी सींच के लबालब किए गए हैं। उन्हीं खेतों की मेढ़ियों पर सरपट भागते, पानी में अपनी परछाई देखते हुए यदा कदा नीले फीते वाली सफ़ेद चप्पल फिसल जाती है और घुटने तक पैर जीभ लपलपाती मिट्टी में जा धंसता है। किसी तरह जोर जबरदस्ती से पैर निकाला जाता है, फिर हाथ डाल कर मिट्टी से दाएं पैर की वो चप्पल भी खींच ली जाती है। फीता निकल चुका है। चेहरे पर भय साफ़ दिखता है। मिट्टी में फिसलता देख बेपरवाह, कुछ देर पहले लगातार हँस रही यार मंडली अब हौसला दिलाने लगी है। छुटकी चापाकल चला रही है, और दो साथी लकड़ी के एक टुकड़े से फीता दुबारा अपनी जगह धकेलने में लगे हुए हैं।
टहनियों पर लदे पक आए आम अब हल्की हवा में भी नीचे कूद पड़ते हैं। पत्थरों, मिट्टी के ढेलों, और गुलेलों के अनगिनत प्रहारों से अभी तक बचे हुए आम भी अब उकताये हुए आंधियों का इंतजार कर रहे। इस बार जब आंधी आती है तो बाल मंडली चप्पल घर पर ही रख बगीचे की ओर खाली पैर भाग चलती है। घरवालों ने हिदायत दी है कि तेज़ बारिश आए तो बगल वाले मंदिर के बरामदे में छुप जाना है। बगल वाले पोखरे में नहाने के बारे में सोचना भी एक अक्षम्य अपराध है।
ऐसे ही किसी दिन पोखरा, तालाब में नहाते हुए पकड़े जाते हैं। बाजार से वापस गांव की ओर साइकिल से जा रहे एक जिम्मेवार बुजुर्ग ने ये देख लिया है कि फलाने-फलाने के बच्चे तालाब में नहा रहे हैं। अब ये सब मालूम होने के बाद भी यदि बाबूजी दैनिक व्यस्तताओं की वजह से कूट नहीं पाए तो फिर आप नैचुरल क्षमादान जानकर निरंतर गलतियां किए जा रहे हैं। किसी दिन बिना पूछे दादाजी की साइकिल निकाल कर सीखने ले गए हैं, गिरा गिरा के हैंडल टेढ़ा कर दिया हैं। तो किसी रोज पेटदर्द का बहाना बनाकर ट्यूशन नहीं गए हैं और फ़िर जोरों हंसते, बैट बॉल खेलते हुए पाए गए हैं। अब किसी दिन सूद समेट सचमुच कूटे जा रहे हैं और मन ही मन ये सोच रहे हैं कि ये आखिर कौन से वाले गलती की सजा है। (सुंदर!!, सुंदर!!)
लखनऊ वाली बुआजी जब भी जाती हैं, दस रूपये का करारा नोट मुट्ठी में पकड़ा जाती हैं। आज जाते वक्त अम्मा से लिपटकर फफककर रो रही हैं। चाची, दादी लोगों की भी आँखे आज नम है। कह रही हैं, “हां! बेटियां तो पराया धन ही होती हैं। एक हफ्ता कैसे बीत गया पता ही नहीं चला।” आप बुआ के इर्दगिर्द ही मंडरा रहे हैं। बुआजी आंसू पोंछते फ़िर जरा मुस्कुराते हुए गाल खींचती है और अपने ससुराल आने का निमंत्रण देती हैं, "जल्दी जल्दी बड़े हो जाओ फिर लखनऊ आना। ठीक है!!!", कहते हुए रो पड़ती हैं।
आपका भी मन थोड़ा दुःखी हो ही जाता है। पर ऐसा लगता है कि मायका छूटने पर आज बुआजी शायद कुछ ज्यादा ही दुखी हैं इसलिए शायद पैसा देना भूल गईं हैं। आप छोटा वाला थैला जिसमें रस्ते के लिए खाना रखा हुआ है, लेकर तुरत बाहर भागते हैं और गाड़ी में रख देते हैं। बुआजी गाड़ी तक आती हैं और कहती हैं, “अम्मा को पैसे दिए हैं, लेकर मिठाई खा लेना।” आप गहरी सांस लिए जाती हुई गाड़ी की ओर देखते हैं। दौड़ लगाते हैं। गाड़ी दूर जा चुकी है। और उन दस रुपयों से समोसे खाने की आस भी, अब उड़न छू हो चुकी है।
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कल्पनाओं, पुरानी यादों को टटोलने की हकदारी कुछेक प्रजातियों को ही मिली है। ऐसे में अगर कभी मन का नहीं मिला तो, व्याकुल ना होइए। प्यार, पैसा, पद और प्रतिष्ठा मिलती छूटती रहती है। छुटकपन के पिटारे से रोज़ नई यादें खींच लाइए। दो दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से अगर नीचे पानी भर गया है। तो नींबू वाली भाप देती खुशबूदार चाय बनाइये, कोई पुराना काग़ज़ लीजिए और नाव बनाने वाली वो भूली हुई विद्या आँखें बंद फिर हासिल करिए। खयाली समस्याओं या दिमाग़ खाते लोगों को हटट्!! या भक्क!!, जो भी मुनासिब लगता है, बोलने की आदत फिर से ले आइए। और जोर से कहिए,
“धर्म की जय हो,
अधर्म का नाश हो!
प्राणियों में सद्भावना हो!
विश्व का कल्याण हो!”
इसके बाद ही सुकून मिलेगा।
(समाप्त)
🪷


As well your writing is great sir !!
This was such a fun read . ✨🙂↕️🙌🏻
School ke wakt ki hindi ki kitab yaad aa gayi . ✨🫶🏻
“आखिर कौन से वाले गलती की सजा है”… 😂😂🙏🏻